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हर व्यक्ति में कुछ न कुछ दैवीय छिपा होता है। कुछ ऐसा, जो केवल उसका होता है और उसमें ही होता है। यह उसका एक ऐसा गुण होता है, जो उसमें अपनी संपूर्णता में विद्यमान मिलेगा और अपनी पूरी शक्ति के साथ। ईश्वर ने हमें जो कुछ दिया है, या जो देने से रह गए हैं, उससे शेष बचे हुए में यह विद्यमान मिलेगा। हमारा काम है कि हम इसे ढूंढें। उसका विकास करें और फिर उसका उपयोग करें। हमारी शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य भी यही होना चाहिए। शिक्षा के माध्यम से विकास पथ पर बढ़ रही आत्माओं की उनके विकास में सहायता की जाए, ताकि वह स्वयं में छिपे उस सर्वोत्तम, संपूर्ण और मौलिक गुण का विकास कर सकें। फिर उसे तराशकर महान कार्यों हेतु उपयोग में ला सकें।


- श्री अरविन्द घोष

भगवान बुद्ध प्रेरक प्रसंग क्यों हुआ भारत में भगवान बुद्ध का जन्म
द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान राइफल की गोली एक जापानी सैनिक के कंधे में लगी, तो वह लड़खड़ाकर वहीं गिर पड़ा। निरंतर खून बहने के कारण कमजोरी बढ़ने लगी। वह जीवन और मृत्यु के बीच जूझ रहा था। एक भारतीय सैनिक की दृष्टि उस पर पड़ी, सुप्त मानवता जाग उठी। वह सोचने लगा कि अंतिम क्षणों में शत्रुता कैसी? दुःख के समय सहायता करना तो प्रत्येक मानव का कर्तव्य होना चाहिए। वह उसके पास गया। उसका सिर अपनी गोद में रखकर एक गिलास में चाय निकालकर उसके मुंह से लगाते हुए कहा-मित्र! सैनिक कितने बहादुर होते हैं, यह तो तुमने युद्ध के मोर्चे पत देख ही लिया, अब प्यार से मेरे हाथों से चाय भी पी लो।

जापानी सैनिक के मन में प्रतिशोध की भावना जाग उठी। उसने जेब से चाकू निकाला और उसे भोंक दिया। मरते हुए वह सैनिक नेकी का बदला ऐसे चुकाएगा, भारतीय जवान को इसका आभास भी नहीं था। उसके हाथ से गिलास छूटा और वह खुद भी गिर पड़ा। उसके गिरते ही जापानी सैनिक भी दूसरी ओर लुढ़क गया। चाकू का घाव प्राणघातक न था। दो-तीन दिन बाद भारतीय सैनिक का घाव भरने लगा। एक दिन अस्पताल में उसने करवट बदली, तो तीसरे पलंग पर वही जापानी सैनिक दिखाई पड़ा।

भारतीय सैनिक जब चलने लायक हुआ, तो एक दिन वह चाय का प्याला लेकर जापानी सैनिक के पास जा पहुंचा और मुस्कराते हुए बोला, उस दिन आपको चाय पिलाने की इच्छा अधूरी रह गई थी। भगवान ने मेरी प्रार्थना सुन ली। आज आपको चाय पिलाते हुए बड़ी शांति मिल रही है। आत्मग्लानि ने जापानी सैनिक के प्रतिशोध को खत्म कर दिया था। रुंधे गले से उसने कहा, आज मैं समझा कि भारत में भगवान बुद्ध का जन्म क्यों हुआ था।

- बैजनाथ गुप्त वृजेंद्र
साभार - अमर उजाला | अंतर्यात्रा | 7 जनवरी, 2016 | पेज संख्या - 12

~ प्रेरक-प्रसंग महासंदेश ~


दुश्मन को भी विपत्ति में देखकर सहायता करना भारत के लोगों की विशेषता है।

हिंदी हिन्दी
सरकार ने कहा है कि हिंदी को संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषाओं में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अपना लिखित उत्तर लोकसभा में भेजकर कहा है कि विश्व पटल पर हिंदी की लोकप्रियता को बढ़ाने के लिए सरकार प्रयासरत है। मगर सच तो यह है कि दुनिया तो क्या, भारत में भी हिंदी लोकप्रिय नहीं हो पा रही है। प्रबुद्ध वर्ग अपने बच्चों को हिंदी की उपयोगिता साबित करने में नाकाम रहा है। उच्च वर्ग के साथ मध्यम वर्ग भी हिंदी पढ़ने, पढ़ाने, बोलने में अपने आपको हेय अनुभव करता है। जमीनी स्तर पर इसी मानसिकता को बदलना होगा, तभी हिंदी का कुछ उद्धार संभव है, नहीं तो हिंदी महज 'हिंदी पखवाड़े' में सिमटी हुई रहेगी। इसके साथ ही हिंदी में अच्छा और सुलभ साहित्य भी उपलब्ध कराना होगा। याद रहे, अपनी मातृभाषा को जाने-समझे बिना तरक्की बेमानी है।

~ हेमा शर्मा, बुलंदशहर
ईमेल - manojhema613@gmail.com
साभार - हिन्दुस्तान | मेल बॉक्स | मुरादाबाद | शनिवार 17 दिसंबर 2016 । पेज संख्या - 12

साइकिल बने अनिवार्य
देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए नोटबंदी एकमात्र विकल्प नहीं है। बहुत सारे तरीके हैं, जिनसे अर्थव्यवस्था में व्यापक स्तर पर सुधार लाया जा सकता है। यदि केंद्र कानून बनाकर लोगों तथा अन्य सरकारी कर्मियों के लिए यह अनिवार्य कर दे कि सप्ताह में किसी भी निर्धारित तिथि को एक से दो दिन ( खास परिस्थितियों व आवश्यक सेवाओं को छोड़कर ) साइकिल चलाना अनिवार्य है, तो अर्थव्यवस्था व सेहत में सुधार के अलावा प्रदूषण में कमी का भी एहसास हो सकता है। जब मोटर वाहनों का परिचालन कम होगा, तो पेट्रोलियम ईंधन की खपत भी कम होगी, जिससे वातावरण में विषैले रासायनिक धुएं का मिश्रण भी कम होगा।

~ नवेन्दु नवीन, मुजफ्फरपुर, बिहार
ईमेल - navin.navendu@yahoo.com
साभार - हिन्दुस्तान | मेल बॉक्स | मुरादाबाद | शनिवार 17 दिसंबर 2016 । पेज संख्या - 12

चीन को फायदा
पीओएस ( प्वॉइंट ऑफ सेल ) मशीनों की आपूर्ति चीनी कंपनियों पर निर्भर है। बैंकों ने बड़ी मात्रा में इन मशीनों को मंगाना शुरू कर दिया है। ऐसे में, जब हम डिजिटल लेन-देन की ओर बढ़ रहे हैं, तो इसका फायदा पीओएस मशीनों के माध्यम से चीनी कंपनियों को होना 'मेक इन इंडिया' को आगे बढ़ने से रोकता है। यह बात सरकार के ध्यान में न आना संभव नहीं। फिर भी चीन को चुना गया है। मित्र होने का नाटक करके दुश्मन जैसा बर्ताव करने वाले उस देश से आयात को कम करने की बजाय उसमें बढ़ोतरी के लिए कदम आगे बढ़ाए जा रहे हैं। भारतीय उत्पादकों को मौका ही नहीं मिलेगा, तो हमारी अर्थव्यवस्था कैसे सुधरेगी?

~ अर्पिता पाठक
ईमेल - arpitabpathak@gmail.com
साभार - हिन्दुस्तान | मेल बॉक्स | मुरादाबाद | शनिवार 17 दिसंबर 2016 । पेज संख्या - 12

नकदविहीन अर्थव्यवस्था, कैशलेस अर्थव्यवस्था
आयकर अधिकारियों द्वारा विभिन्न बैंकों, निजी वित्तीय प्रतिष्ठानों और स्वर्णकारों के यहां छापे डालने से करोड़ों नए नोट, सोने की ईंटें और जन-धन खातों में जमा किया गया लाखों का काला धन मिल रहा है। इससे यह बात साबित होती है कि प्रधानमंत्री मोदी की राह आसान नहीं है। यदि बैंक और सर्राफा कारोबारी ईमानदारी से अपना काम करते, तो अब तक नकदी की समस्या खत्म हो गई होती। यदि इसी तरह छापेमारी होती रही, तो काफी मात्रा में नकदी बैंकों में आ जाएगी। वास्तव में देखा जाए, तो इलेक्ट्रॉनिक भुगतान अपनाने के बाद नकदी की जरूरत ही महसूस नहीं होती। इसलिए हमारे देश के अधिक से अधिक लोगों को कैशलेस इकोनॉमी की ओर बढ़ना चाहिए।

~ सुधीर यादव
ईमेल - sudheer.yaadav@gmail.com
साभार - हिन्दुस्तान | मेल बॉक्स | मुरादाबाद | शनिवार 17 दिसंबर 2016 । पेज संख्या - 12

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