हिन्दी साहित्य की रचनाओं का हिन्दी वेब ब्लॉग

चिर महान - सुमित्रानन्दन पन्त

जगजीवन में चिर महान सौन्दर्यपूर्ण औ सत्य-प्राण मैं उसका प्रेमी बनूँ नाथ जो हो मानव के हित समान जिससे जीवन में मिले शक्ति, छूटे भय, संशय, अन्धभक्ति,



जगजीवन में चिर महान 
सौन्दर्यपूर्ण औ सत्य-प्राण 

मैं उसका प्रेमी बनूँ नाथ 
जो हो मानव के हित समान 

जिससे जीवन में मिले शक्ति,
छूटे भय, संशय, अन्धभक्ति,

मैं वह प्रकाश बन सकूँ नाथ 
मिल जायें जिसमें अखिल व्यक्ति,

पाकर प्रभु तुमसे अमर दान
करने मानव का परित्राण 


ला सकूँ विश्व में एक बार 
फिर से नवजीवन का विहान।  

कवि सुमित्रानन्दन पन्त 

कवि सुमित्रानन्दन पन्त 
( प्रकृति के सुकुमार कवि सुमित्रानन्दन पन्त का जन्म सन् 1900 ई. में अल्मोड़ा के निकट कौसानी ग्राम में हुआ था। इनकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम की ही पाठशाला में हुई। असहयोग आन्दोलन के समय इन्होंने कॉलेज छोड़। दिया इनकी साहित्यिक सेवा के लिए भारत सरकार ने इन्हें देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान "पद्म भूषण" से विभूषित किया। इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं - वीणा, ग्रन्थि, पल्लव, गुंजन, चिदम्बरा आदि। पन्त निधन 28 दिसम्बर, सन् 1977 ई. को हुआ। ) 

एक टिप्पणी भेजें

आपके ब्लॉग को ब्लॉग एग्रीगेटर ( संकलक ) ब्लॉग - चिठ्ठा के "सार्वजनिक और सामूहिक चिट्ठे" कॉलम में शामिल किया गया है। कृपया हमारा मान बढ़ाने के लिए एक बार अवश्य पधारें। सादर …. आभार।।

कृपया "ब्लॉग - चिठ्ठा" के फेसबुक पेज को भी लाइक करें :- ब्लॉग - चिठ्ठा

कृपया "ब्लॉग - चिठ्ठा" को ट्विट्टर पर फॉलो करें :- https://twitter.com/Blog_Chiththa

बनारसी साड़ियाँ खरीदें केवल - Laethnic.com/sarees

योगदानकर्ता

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget