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भाषा एकमात्र अनन्त है - अशोक वाजपेयी

न बच्चा रहेगा, न बूढ़ा, न गेंद, न फूल, न दालान रहेंगे फिर भी शब्द भाषा एकमात्र अनन्त है!

फूल झरता है 
फूल शब्द नहीं!
बच्चा गेंद उछालता है,
सदियों के पार 
लोकती है उसे एक बच्ची!
बूढ़ा गाता है एक पद्य,
दुहराता है दूसरा बूढ़ा,
भूगोल और इतिहास से परे 
किसी दालान में बैठा हुआ!
न बच्चा रहेगा, 
न बूढ़ा,
न गेंद, न फूल, न दालान 
रहेंगे फिर भी शब्द 
भाषा एकमात्र अनन्त है!

अशोक वाजपेयी
( काव्य - संग्रह तिनका - तिनका से साभार )


अशोक वाजपेयी 

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