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धूम - धड़ाका :- प्रयाग शुक्ल

हाथों में फुलझड़ी बहुत-से पटाके, धम-धम, धूम-धूम धमा-धम धमाके दूर तक अनार उठा चरखी भी भागी, बुझी-जली, जली-बुझी सोते से जागी रामू, बिरजू दौड़े नीलू भी आई, 'मुन्नी कहां, मुन्नी कहां' बोलो तो भाई! बंद किए कान खड़ी कोने में भाई, सबने मिल फुलझड़ी उसको पकड़ाई नन्ही-सी मुन्नी और नन्ही-सी फुलझड़ी, इधर-उधर देखती वह भी आगे बढ़ी - प्रयाग शुक्ल

हाथों में फुलझड़ी 
बहुत-से पटाके,
धम-धम, धूम-धूम 
धमा-धम धमाके 

दूर तक अनार उठा 
चरखी भी भागी,
बुझी-जली, जली-बुझी 
सोते से जागी 

रामू, बिरजू दौड़े 
नीलू भी आई,
'मुन्नी कहां, मुन्नी कहां'
बोलो तो भाई!

बंद किए कान खड़ी 
कोने में भाई,
सबने मिल फुलझड़ी 
उसको पकड़ाई 

नन्ही-सी मुन्नी 
और नन्ही-सी फुलझड़ी,
इधर-उधर देखती 
वह भी आगे बढ़ी 

- प्रयाग शुक्ल


प्रयाग शुक्ल 

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