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अमर शहीद भगत सिंह के पत्र - 2

भगत सिंह समय-समय पर अपने हितैषियों को पत्र लिखते रहते थे। उन पत्रों से उनकी देशभक्ति, त्याग भावना और स्वदेश के लिए सर्वस्व अर्पित करने की दृढ़ कामना का परिचय मिलता है। अमर शहीद भगत सिंह के पत्र जेल में माँ से भेंट न होने पर भाई कुलबीर सिंह को पत्र

जेल में माँ से भेंट न होने पर भाई कुलबीर सिंह को पत्र :-


प्रिय भाई कुलबीर सिंह जी,
सत श्री अकाल!

मुझे यह जानकर कि एक दिन तुम माँ जी को साथ लेकर आये और मुलाकात का आदेश नहीं मिलने से निराश होकर वापस लौट गये, बहुत दु:ख हुआ। तुम्हें तो पता चल चुका था कि जेल में मुलाकात की इजाजत नहीं देते। फिर माँ जी को साथ क्यों लाये ? मैं जानता हूँ कि इस समय वे बहुत घबरायी हुई हैं, लेकिन इस घबराहट और परेशानी का क्या फायदा, नुकसान ज़रूर है, क्योंकि जब से मुझे पता चला कि वे बहुत रो रही हैं, मैं स्वयं भी बेचैन हो रहा हूँ। घबराने की कोई बात नहीं, फिर इससे कुछ मिलता भी नहीं।

सभी साहस से हालात का मुकाबला करें। आखिरकार दुनिया में दूसरे लोग भी तो हजारों मुसीबतों में फँसे हुए हैं। और फिर अगर लगातार एक बरस तक मुलाकातें करके भी तबीयत नहीं भरी तो और दो-चार मुलाकातों से भी तसल्ली न होगी। मेरा ख्याल है कि फैसले और चालान के बाद मुलाकातों से पाबन्दी हट जायेगी, लेकिन माना कि इसके बावजूद मुलाकात की इजाजत न मिले तो.……… इसलिए घबराने से क्या फायदा ?

तुम्हारा भाई,
भगत सिंह 
सेंट्रल जेल, लाहौर 
3 मार्च, 1931
  

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बढ़िया जानकारी धन्यवाद
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थोड़े से ज्ञान के आधार पर, यह ब्लॉग मैं खुद लिख रहा हूँ, इसे और अच्छा बनाने के लिए तथा अधिकतम पाठकों तक पहुँचाने के लिए तकनीकी जानकारी प्रदान करने वालोंका आभारी रहूँगा।

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