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हिंदी को अपनाएं

आधुनिक हिंदी को भी डेढ़ सौ बरस से अधिक हो गए। फिर भी हम हिंदी का वास्तविक जीवन में प्रयोग कम करते हैं, क्योंकि कमी हमारी भाषा में नहीं, हमारे अंदर है, जो हम अपनी भाषा को तवज्जो न देकर विदेशी भाषाओं की तरफ रुझान कर रहे हैं। हमें अपनी हिंदी भाषा पर ही विश्वास नहीं है। हिंदी भाषा का मतलब हिन्दुस्तान और हिन्दुस्तान जबान से है। जब पश्चिम के लोग हमारी भाषा में दिलचस्पी ले सकते हैं, तो क्या हम हिन्दुस्तानी होकर अपनी भाषा को बढ़ावा नहीं दे सकते?

आधुनिक हिंदी को भी डेढ़ सौ बरस से अधिक हो गए। फिर भी हम हिंदी का वास्तविक जीवन में प्रयोग कम करते हैं, क्योंकि कमी हमारी भाषा में नहीं, हमारे अंदर है, जो हम अपनी भाषा को तवज्जो न देकर विदेशी भाषाओं की तरफ रुझान कर रहे हैं। हमें अपनी हिंदी भाषा पर ही विश्वास नहीं है। हिंदी भाषा का मतलब हिन्दुस्तान और हिन्दुस्तान जबान से है। जब पश्चिम के लोग हमारी भाषा में दिलचस्पी ले सकते हैं, तो क्या हम हिन्दुस्तानी होकर अपनी भाषा को बढ़ावा नहीं दे सकते? अपनी भाषा सबसे अहम है, क्योंकि उसमें हमारा मान है। हिंदी ने सबको अपनाया है, तो क्या हमारा फर्ज नहीं बनता कि हम अब उसको अपनाएं और बढ़ावा दें। डरकर अपनी भाषा को कृत्रिम न बनाएं, उसे समझें और समझाएं। जो बोली में बसता है, वह घर है। घर से दूर कौन-सा ठौर है?

~ शिवांगी सेंगर
आगरा, उत्तर प्रदेश
साभार - हिन्दुस्तान दैनिक | पेज नं. 10 | मुरादाबाद | शनिवार | 12 सितम्बर, 2015

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