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सच से पर्दा उठे

सुभाषचंद्र बोस से जुड़े सच को सिर्फ इसलिए छिपाए रखने का औचित्य नहीं है कि इससे किसी अन्य देश के साथ हमारे रिश्ते खराब होंगे और देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी का सच सामने आएगा।

नेताजी सुभाषचंद्र बोस और उनके परिवार से जुड़ी चौंसठ गोपनीय फाइलों को सार्वजनिक कर पश्चिम बंगाल की तृणमूल सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। कायदे से आजादी के बाद ही सुभाषचंद्र बोस से जुड़ी गोपनीय जानकारियां सार्वजनिक हो जानी चाहिए थीं। लेकिन ऐसा न करके प्रथम प्रधानमंत्री पंडित नेहरू ने नेताजी के संदर्भ में ब्रिटिशकालीन नीति को ही कायम रखा। उनका तर्क था कि नेताजी का सच सामने आने से कई देशों से हमारे रिश्ते खराब होंगे। इसी से यह धारणा बनी कि नेहरू के नेताजी के साथ रिश्ते सहज नहीं थे, और वह उनसे जुड़ा सच नहीं बताना चाहते थे। यह इसलिए भी कहना पड़ता है कि 1945 में ताइवान में हुई वायुयान दुर्घटना में सुभाषचंद्र की मृत्यु की सूचना पर देश ने न सिर्फ पूरी तरह यकीन नहीं किया, बल्कि आजादी के दौर के वह इकलौते व्यक्तित्व थे, जिनके वेश बदलकर लौटने के बारे में अनेकानेक कहानियां समय-समय पर सामने आईं, जिनकी सत्यता भी हालांकि कभी प्रमाणित नहीं हो पाई। नेताजी का सच जानने के लिए जो तीन प्रयास हुए, उनमें से मुखर्जी आयोग का निष्कर्ष था कि उनकी मौत 1945 में विमान दुर्घटना में नहीं हुई थी। अब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी कहा है कि इन फाइलों को पढ़ने से ऐसा लगता है कि सुभाषचंद्र बोस 1945 के बाद भी जीवित थे ! आजादी के बाद लंबे समय तक नेताजी के कोलकाता स्थित आवास पर उनके परिजनों की जासूसी होती थी, इन फाइलों के सार्वजनिक होने से इसकी भी पुष्टि हुई है। चूंकि स्वतंत्रता के बाद केंद्र में कांग्रेस ही ज्यादातर सत्ता में रही, इसलिए नेताजी के प्रति उन सरकारों का रवैया समझ में आता है। पर अब केंद्र में चूंकि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार है, ऐसे में लाजिमी है कि वह नेताजी से जुड़ी सौ से भी अधिक गोपनीय फाइलों को सार्वजनिक करे। यह इसलिए भी जरूरी है कि उन फाइलों के जरिये नेताजी के जीवन से जुड़े सच के और करीब पहुंचा जा सकता है। सुभाषचंद्र बोस से जुड़े सच को सिर्फ इसलिए छिपाए रखने का औचित्य नहीं है कि इससे किसी दूसरे देश के साथ हमारे रिश्ते खराब होंगे और देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी का सच सामने आएगा।


साभार अमर उजाला संपादकीय | प्रवाह | मुरादाबाद | शनिवार | 19 सितम्बर, 2015

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