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नकदविहीन अर्थव्यवस्था

बैंक और सर्राफा कारोबारी ईमानदारी से अपना काम करते, तो अब तक नकदी की समस्या खत्म हो गई होती। यदि इसी तरह छापेमारी होती रही, तो काफी मात्रा में नकदी बैंकों में आ जाएगी। वास्तव में देखा जाए, तो इलेक्ट्रॉनिक भुगतान अपनाने के बाद नकदी की जरूरत ही महसूस नहीं होती। इसलिए हमारे देश के अधिक से अधिक लोगों को कैशलेस इकोनॉमी की ओर बढ़ना चाहिए।

नकदविहीन अर्थव्यवस्था, कैशलेस अर्थव्यवस्था
आयकर अधिकारियों द्वारा विभिन्न बैंकों, निजी वित्तीय प्रतिष्ठानों और स्वर्णकारों के यहां छापे डालने से करोड़ों नए नोट, सोने की ईंटें और जन-धन खातों में जमा किया गया लाखों का काला धन मिल रहा है। इससे यह बात साबित होती है कि प्रधानमंत्री मोदी की राह आसान नहीं है। यदि बैंक और सर्राफा कारोबारी ईमानदारी से अपना काम करते, तो अब तक नकदी की समस्या खत्म हो गई होती। यदि इसी तरह छापेमारी होती रही, तो काफी मात्रा में नकदी बैंकों में आ जाएगी। वास्तव में देखा जाए, तो इलेक्ट्रॉनिक भुगतान अपनाने के बाद नकदी की जरूरत ही महसूस नहीं होती। इसलिए हमारे देश के अधिक से अधिक लोगों को कैशलेस इकोनॉमी की ओर बढ़ना चाहिए।

~ सुधीर यादव
ईमेल - sudheer.yaadav@gmail.com
साभार - हिन्दुस्तान | मेल बॉक्स | मुरादाबाद | शनिवार 17 दिसंबर 2016 । पेज संख्या - 12

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