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सरकार ने कहा है कि हिंदी को संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषाओं में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अपना लिखित उत्तर लोकसभा में भेजकर कहा है कि विश्व पटल पर हिंदी की लोकप्रियता को बढ़ाने के लिए सरकार प्रयासरत है। मगर सच तो यह है कि दुनिया तो क्या, भारत में भी हिंदी लोकप्रिय नहीं हो पा रही है। प्रबुद्ध वर्ग अपने बच्चों को हिंदी की उपयोगिता साबित करने में नाकाम रहा है। उच्च वर्ग के साथ मध्यम वर्ग भी हिंदी पढ़ने, पढ़ाने, बोलने में अपने आपको हेय अनुभव करता है। जमीनी स्तर पर इसी मानसिकता को बदलना होगा, तभी हिंदी का कुछ उद्धार संभव है, नहीं तो हिंदी महज 'हिंदी पखवाड़े' में सिमटी हुई रहेगी। इसके साथ ही हिंदी में अच्छा और सुलभ साहित्य भी उपलब्ध कराना होगा। याद रहे, अपनी मातृभाषा को जाने-समझे बिना तरक्की बेमानी है।

~ हेमा शर्मा, बुलंदशहर
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साभार - हिन्दुस्तान | मेल बॉक्स | मुरादाबाद | शनिवार 17 दिसंबर 2016 । पेज संख्या - 12