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खुद में छिपा वह गुण - श्री अरविन्द घोष

हर व्यक्ति में कुछ न कुछ दैवीय छिपा होता है। कुछ ऐसा, जो केवल उसका होता है और उसमें ही होता है। यह उसका एक ऐसा गुण होता है, जो उसमें अपनी संपूर्णता में विद्यमान मिलेगा और अपनी पूरी शक्ति के साथ।

हर व्यक्ति में कुछ न कुछ दैवीय छिपा होता है। कुछ ऐसा, जो केवल उसका होता है और उसमें ही होता है। यह उसका एक ऐसा गुण होता है, जो उसमें अपनी संपूर्णता में विद्यमान मिलेगा और अपनी पूरी शक्ति के साथ। ईश्वर ने हमें जो कुछ दिया है, या जो देने से रह गए हैं, उससे शेष बचे हुए में यह विद्यमान मिलेगा। हमारा काम है कि हम इसे ढूंढें। उसका विकास करें और फिर उसका उपयोग करें। हमारी शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य भी यही होना चाहिए। शिक्षा के माध्यम से विकास पथ पर बढ़ रही आत्माओं की उनके विकास में सहायता की जाए, ताकि वह स्वयं में छिपे उस सर्वोत्तम, संपूर्ण और मौलिक गुण का विकास कर सकें। फिर उसे तराशकर महान कार्यों हेतु उपयोग में ला सकें।


- श्री अरविन्द घोष

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