जब इरादे मंगल होते हैं

आज हम सभी भारतीय गर्व महसूस कर रहे हैं। सीमाओं के बावजूद हमारी महत्वाकांक्षा सबसे बेहतर को पाने की है। हमारे अंतरिक्ष अभियान की सफलता इस बात का उदाहरण है कि हम क्या कर सकते हैं। यह हमें प्रेरणा देता है कि हम सर्वोत्तम को पाने की कोशिश करें। अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए कई क्षेत्रों की विशेषज्ञता की जरूरत होती है। एक अंतरिक्ष कार्यक्रम की सफलता बहुत सारे क्षेत्रों के लिए एप्लीकेशन तैयार करती है। ऐतिहासिक तौर पर हमारा मुख्य लक्ष्य है राष्ट्र का निर्माण। अंतरिक्ष तकनीक को अंतरिक्ष एप्लीकेशंस में बदलना। आप वैज्ञानिकों ने जो काम किया है, उसको अगर हम रोजमर्रा की जिंदगी में लागू करें, तो हम जीवन बदल सकते हैं। पूरा गवर्नेंस बदल सकते हैं। हमारे प्रयास, हमारे देश के प्रशासन की गुणवत्ता, जीवन की गुणवत्ता, उपलब्धियों की गति इन सबमें बहुत बड़ा बदलाव लाने का सामर्थ्य रखते हैं। हमें अपनी उपलब्धियों को देश के हर कोने में पहुंचाना है, प्रशासन में गहराई लानी है, अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना है, जीवन को सुधारना है। हम पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी है।

आज मंगल को मॉम मिल गई है। जिस समय इस मिशन के नाम का संक्षेप मॉम बन गया, तो मुझे पूरा विश्वास था कि मां कभी निराश नहीं करती है। साधन बहुत कम, अनेक मर्यादाएं और उसके बावजूद इतनी बड़ी सिद्धि प्राप्त होती है, वह वैज्ञानिकों के विश्वास के कारण, उनके पुरुषार्थ के कारण, उनकी प्रतिबद्धता के कारण हुई है। इसलिए हमारे देश के वैज्ञानिक अनेक-अनेक अभिनंदन के अधिकारी हैं।

मंगलयान ने मंगल तक करीब 68 करोड़ किलोमीटर की यात्रा पूरी की। हम उस हद के भी पार चले गए, जहां तक मानव के प्रयास और उसकी कल्पनाएं नहीं पहुंच पाती हैं। हम इस यान को उस रास्ते पर बहुत सटीक ढंग से ले गए, जिसके बारे में बहुत कम ही लोग जानते हैं। सूरज की किरण को हमारे पास पहुंचने में जितना समय लगता है, उससे भी ज्यादा समय, यहां से हमारे वैज्ञानिक, उसे कुछ संकेत भेजते हैं, तो इसमें उससे भी ज्यादा समय लग जाता है। यानी कि कितने धीरज के साथ कमांड देने के बाद 12-15 मिनट तक इंतजार करना पड़ता है कि गया या नहीं गया है।

मंगल ग्रह पर भेजे गए अभियानों की गणित हमारे विरुद्ध थी। अभी तक मंगल के लिए 51 अभियान चलाए गए हैं, उनमें से सिर्फ 21 ही कामयाब हुए। हम फिर भी कामयाब हो गए। दुनिया में सबको सफलता नहीं मिली। और पहली बार में तो किसी देश को नहीं मिली। इस शानदार कामयाबी के साथ इसरो का नाम दुनिया की उन तीन एजेंसियों में शामिल हो गया, जो इस लाल ग्रह पर पहुंचने में कामयाब हुईं। सिर्फ तीन साल में, यह छोटी बात नहीं है।

इसे अपने देश में ही बनाया गया। बेंगलुरु से भुवनेश्वर तक और फरीदाबाद से राजकोट तक पूरे भारत में इसके लिए प्रयास हुए। मैं अहमदाबाद इसरो में बार-बार जाता था। बड़ा मन करता था, क्या कर रहे हैं वैज्ञानिक। बेचारे, लैब से बाहर नहीं निकलते हैं, तो कोई तो जाए मिलने के लिए। मैं जाता था और तब मुझे पता चला कि मीथेन का सेंसर वहां बन रहा था और दूसरा, वहां कैमरा बन रहा था। और शायद दुनिया में मीथेन गैस की जानकारी देने का पहला काम ये आपके प्रयत्नों से होगा। हमने लागत कम रखने के लिए छोटे रॉकेट का इस्तेमाल किया, लेकिन इससे उस मिशन की जटिलता और बढ़ गई, जो पहले ही चुनौतीपूर्ण था। मैं पिछली बार जब श्रीहरिकोटा गया था, तब कहा था कि अमेरिका के हॉलीवुड में जो फिल्में बनती हैं, उससे भी कम खर्च में हमारे वैज्ञानिकों ने यह काम किया है।

अनिश्चितता हर यात्रा का हिस्सा होती है, इसका सामना हर उस यात्री को करना पड़ता है, जो लीक को तोड़ रहा है। कुछ नया पाने की भूख, कुछ नया खोजने का रोमांच, यह सब कमजोर दिल वालों के लिए नहीं है। मेरे सामने दो प्रस्ताव थे। जब यह सवाल आया कि आज सुबह मैं कहां रहूं? सब साइंटिस्टों ने कहा कि साहब, दुनिया में यह बहुत कठिन काम है। सफल होंगे, नहीं होंगे। आपको बुलाना, नहीं बुलाना, हमें दुविधा है। मैंने कहा, चिंता मत कीजिए। विफलता आती है, तो मेरी पहली जिम्मेवारी बनती है, इन वैज्ञानिकों के बीच आने की। यश लेने के लिए सब आते हैं। लेकिन काम भी तो मंगल था। और जब काम मंगल होता है, इरादे मंगल होते हैं, तो मंगल की यात्रा भी तो मंगल होती है।

हर सफलता के साथ नई चुनौतियां भी आती हैं, भारत के वैज्ञानिकों और नौजवानों में ऐसी हर चुनौती का जवाब देने की ताकत है। जोखिम तो हर नई खोज की फितरत ही होती है, क्योंकि आप वह करने जा रहे हैं, जो इसके पहले कभी किया ही नहीं गया। अज्ञात में छलांग लगाए बिना मानवता कभी तरक्की नहीं कर सकती थी और अंतरिक्ष तो सबसे बड़ा अज्ञात है। इस अज्ञात को खोजने का जितना उत्साह इसरो में है, उतना किसी और में नहीं। आपने अपनी मेहनत और प्रतिभा से इसे कर दिखाया, इसे संभव बना दिया। अब मेरे इसरो के वैज्ञानिकों को असंभव को संभव करने की जैसे आदत ही लग गई है। आपने विपरीत हालात के बावजूद देश को एक महत्वपूर्ण क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना दिया।

आज हम सभी भारतीय गर्व महसूस कर रहे हैं। सीमाओं के बावजूद हमारी महत्वाकांक्षा सबसे बेहतर को पाने की है। हमारे अंतरिक्ष अभियान की सफलता इस बात का उदाहरण है कि हम क्या कर सकते हैं। यह हमें प्रेरणा देता है कि हम सर्वोत्तम को पाने की कोशिश करें। अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए कई क्षेत्रों की विशेषज्ञता की जरूरत होती है। एक अंतरिक्ष कार्यक्रम की सफलता बहुत सारे क्षेत्रों के लिए एप्लीकेशन तैयार करती है। ऐतिहासिक तौर पर हमारा मुख्य लक्ष्य है राष्ट्र का निर्माण। अंतरिक्ष तकनीक को अंतरिक्ष एप्लीकेशंस में बदलना। आप वैज्ञानिकों ने जो काम किया है, उसको अगर हम रोजमर्रा की जिंदगी में लागू करें, तो हम जीवन बदल सकते हैं। पूरा गवर्नेंस बदल सकते हैं। हमारे प्रयास, हमारे देश के प्रशासन की गुणवत्ता, जीवन की गुणवत्ता, उपलब्धियों की गति इन सबमें बहुत बड़ा बदलाव लाने का सामर्थ्य रखते हैं। हमें अपनी उपलब्धियों को देश के हर कोने में पहुंचाना है, प्रशासन में गहराई लानी है, अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना है, जीवन को सुधारना है। हम पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी है।

सदियों पहले आर्यभट्ट जैसे अनेक महापुरुषों ने हमें शास्त्र का ज्ञान दिया। हमें शून्य दिया। यही शून्य आज सारे जगत को गति देने का कारण बन गया है। कोई ऐसा विषय नहीं, जिसे हमारे पूर्वजों ने रास्ता बनाकर न रखा हो। इस परंपरा को निभाने के लिए हम अपने आप को गौरवान्वित महसूस करते हैं। आधुनिक भारत को यह भूमिका लगातार निभानी होगी, ताकि 'जगत-गुरु भारत' बन सके। आप ही के पुरुषार्थ से तो यह होने वाला है। पश्चिम का दर्शन एक रेखा में सोचता है, जबकि पूरब की समझ यह कहती है कि ब्रह्मांड में न तो कोई पूर्ण शुरुआत है और न कोई पूर्ण अंत। एक निरंतरता है, विरक्तता के चक्र हैं और कठिनाइयों के पार पाने की कोशिशें हैं। आइए, आज की कामयाबी के बाद हम और ज्यादा उत्साह, और ज्यादा ताकत के साथ आगे बढ़ें। उन लक्ष्यों की ओर बढ़ें, जो इससे ज्यादा चुनौतीपूर्ण हैं। जिन्हें हासिल करना इससे भी ज्यादा कठिन है। आइए, अपनी सीमाओं को और आगे ले जाएं।


भारत के प्रधानमंत्री - नरेंद्र मोदी


( प्रधानमंत्री द्वारा मार्स ऑर्बिटर मिशन ( मॉम ) की सफलता पर 24 सितम्बर, 2014 ई. को दिए गए भाषण के संपादित अंश )

COMMENTS

नाम

अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस,1,अटल बिहारी वाजपेयी,1,अमर उजाला,4,अशोक वाजपेयी,2,इतिहास,2,इसरो,1,एक साल,1,ओसामा मंजर,1,कविता,20,कहानी,2,कैलाश वाजपेयी,1,क्षुद्रग्रह,1,गोपालदास 'नीरज',1,जन्म दिवस,8,जयप्रकाश भारती,1,जयशंकर प्रसाद,1,जल संकट,1,जानकारी,1,ज्ञानेन्द्र रावत,1,टिप्पणी,10,डॉ . हरिवंश राय 'बच्चन',1,डॉ. रवींद्र चतुर्वेदी,1,तरुण विजय,1,तीज-त्यौहार,1,त्रिलोचन,2,दीपावली,1,नमस्कार,1,नरेंद्र मोदी,1,नववर्ष,1,निबन्ध,2,नेताजी सुभाष चंद्र बोस,1,नेताजी सुभाषचंद्र बोस,1,पत्र,3,प्रधानमंत्री,1,प्रभा मजूमदार,1,प्रयाग शुक्ल,1,प्रेरक प्रसंग,1,प्रेरक विचार,1,प्रेरक-प्रसंग,1,प्रेरणादायक लेख,2,बॉक्सिंग डे,1,भगत सिंह,3,भगवान बुद्ध,1,भाई दूज,1,भारत,3,भारतेन्दु हरिश्चन्द्र,3,मंगलयान,1,मनोज बाजपेयी,1,महादेवी वर्मा,1,मार्स ऑर्बिटर मिशन,1,मास्टर रामकुमार,1,मुकेश पाण्डेय 'चन्दन',1,मैथिलीशरण गुप्त,1,यश,1,राजीव कटारा,1,राजीव सक्सेना,1,रामधारी सिंह 'दिनकर',1,राममोहन पाठक,1,रिपोर्ताज,1,लेख,14,लोहड़ी,1,विदेशी अखबार से,1,विनोबा भावे,1,विशेष,15,विश्व हिंदी सम्मेलन,1,विश्व हिन्दी दिवस,2,विश्व हिन्दी दिवस सप्ताह सम्मेलन-2016,1,वैज्ञानिक लेख,1,व्यंग्य,1,शुभारंभ,1,श्री अरविन्द घोष,1,संकल्प,1,संपादकीय,1,संस्मरण,1,सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन 'अज्ञेय',1,समाज,2,सरदार वल्लभ भाई पटेल,1,साभार,22,सामान्य ज्ञान,2,सियारामशरण गुप्त,1,सुमित्रानन्दन पन्त,2,सूर्यकान्त त्रिपाठी ' निराला ',1,स्वागत,1,हर्ष,26,हिन्दी,11,हिन्दी चिट्ठा,15,हिन्दी दिवस,2,हिन्दुस्तान दैनिक,16,हिन्दुस्तान संपादकीय,2,हूबनाथ,1,हेमेन्द्र मिश्र,2,
ltr
item
हिन्दी चिट्ठा : जब इरादे मंगल होते हैं
जब इरादे मंगल होते हैं
आज हम सभी भारतीय गर्व महसूस कर रहे हैं। सीमाओं के बावजूद हमारी महत्वाकांक्षा सबसे बेहतर को पाने की है। हमारे अंतरिक्ष अभियान की सफलता इस बात का उदाहरण है कि हम क्या कर सकते हैं। यह हमें प्रेरणा देता है कि हम सर्वोत्तम को पाने की कोशिश करें। अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए कई क्षेत्रों की विशेषज्ञता की जरूरत होती है। एक अंतरिक्ष कार्यक्रम की सफलता बहुत सारे क्षेत्रों के लिए एप्लीकेशन तैयार करती है। ऐतिहासिक तौर पर हमारा मुख्य लक्ष्य है राष्ट्र का निर्माण। अंतरिक्ष तकनीक को अंतरिक्ष एप्लीकेशंस में बदलना। आप वैज्ञानिकों ने जो काम किया है, उसको अगर हम रोजमर्रा की जिंदगी में लागू करें, तो हम जीवन बदल सकते हैं। पूरा गवर्नेंस बदल सकते हैं। हमारे प्रयास, हमारे देश के प्रशासन की गुणवत्ता, जीवन की गुणवत्ता, उपलब्धियों की गति इन सबमें बहुत बड़ा बदलाव लाने का सामर्थ्य रखते हैं। हमें अपनी उपलब्धियों को देश के हर कोने में पहुंचाना है, प्रशासन में गहराई लानी है, अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना है, जीवन को सुधारना है। हम पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी है।
http://2.bp.blogspot.com/-kcY5VI-jrBQ/VgQfHIhG04I/AAAAAAAACLc/VeJvzDnd2jg/s1600/%25E0%25A4%25A8%25E0%25A4%25B0%25E0%25A5%2587%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25A6%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%2B%25E0%25A4%25AE%25E0%25A5%258B%25E0%25A4%25A6%25E0%25A5%2580.jpg
http://2.bp.blogspot.com/-kcY5VI-jrBQ/VgQfHIhG04I/AAAAAAAACLc/VeJvzDnd2jg/s72-c/%25E0%25A4%25A8%25E0%25A4%25B0%25E0%25A5%2587%25E0%25A4%25A8%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25A6%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B0%2B%25E0%25A4%25AE%25E0%25A5%258B%25E0%25A4%25A6%25E0%25A5%2580.jpg
हिन्दी चिट्ठा
https://www.hindichittha.com/2015/09/Speech-in-Hindi-by-the-PM-Narendra-Modi-on-the-success-of-the-Mars-Orbiter-Mission.html
https://www.hindichittha.com/
http://www.hindichittha.com/
http://www.hindichittha.com/2015/09/Speech-in-Hindi-by-the-PM-Narendra-Modi-on-the-success-of-the-Mars-Orbiter-Mission.html
true
1774022179531435779
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS CONTENT IS PREMIUM Please share to unlock Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy