खुद हमें हिंदी की कितनी चिंता है - हेमेन्द्र मिश्र

माना जाता है मनुष्य व्यवहार के साथ भाषा हर क्षण बदलती है, क्योंकि यही बदलाव उसके जीवित होने का सबूत है। हिंदी भी दिनोंदिन बदल रही है, और बढ़ रही है। 2001 में ही देश की 42.2 करोड़ आबादी हिंदी बोल रही थी, जिसमें 2011 की जनगणना में इजाफा हुआ ही होगा। इसी तरह वैश्विक परिदृश्य में हिंदी सीखने वाले लोगों की संख्या भी पिछले आठ वर्षों में करीब 50 फीसदी बढ़ी है। आकलन यह भी है कि दुनिया की शीर्ष तीन भाषाओं में हिंदी शामिल है ! इन तमाम तस्वीरों के बाद भी इन दिनों हिंदी भाषाप्रेमी इस लोकप्रिय भाषा के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। आखिर क्यों? दरअसल, विकल्प आधारित क्रेडिट प्रणाली ( सीबीसीएस ) ने अंतर-स्नातक में हिंदी को वैकल्पिक विषय बना दिया है।

माना जाता है मनुष्य व्यवहार के साथ भाषा हर क्षण बदलती है, क्योंकि यही बदलाव उसके जीवित होने का सबूत है। हिंदी भी दिनोंदिन बदल रही है, और बढ़ रही है। 2001 में ही देश की 42.2 करोड़ आबादी हिंदी बोल रही थी, जिसमें 2011 की जनगणना में इजाफा हुआ ही होगा। इसी तरह वैश्विक परिदृश्य में हिंदी सीखने वाले लोगों की संख्या भी पिछले आठ वर्षों में करीब 50 फीसदी बढ़ी है। आकलन यह भी है कि दुनिया की शीर्ष तीन भाषाओं में हिंदी शामिल है ! इन तमाम तस्वीरों के बाद भी इन दिनों हिंदी भाषाप्रेमी इस लोकप्रिय भाषा के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। आखिर क्यों? दरअसल, विकल्प आधारित क्रेडिट प्रणाली ( सीबीसीएस ) ने अंतर-स्नातक में हिंदी को वैकल्पिक विषय बना दिया है। 


अब तक उत्तर भारत के तमाम केंद्रीय विश्वविद्यालयों में अनिवार्य विषय होने के कारण छात्रों के लिए इसे पढ़ना जरूरी था। मगर अब इसे पढ़ना 'मजबूरी' नहीं। आशंका यह है कि वैकल्पिक विषय होने के कारण अंग्रेजी या अन्य आधुनिक भाषाओं के प्रति ही छात्र ज्यादा आकर्षित होंगे। यह ठीक है कि बाजार में हिंदी का झंडा बुलंद है। साबून-शैंपू सहित मोबाइल, कंप्यूटर, टीवी जैसे महंगे उत्पादों के विज्ञापन भी हिंदी में आने लगे हैं। बाहर हिंदी की पैठ और गहरी हुई है। लेकिन देश के भीतर एक भाषा के रूप में हिंदी मजबूत हुई है, यह नहीं कह सकते। ठेठ हिंदी प्रदेश के रूप में पहचाने जाने वाले उत्तर प्रदेश में आज भी स्कूली छात्र बड़ी संख्या में हिंदी में फेल होते हैं। रचनात्मकता के मोर्चे पर हिंदी पहले जैसी ऊर्वर है, यह जोर देकर नहीं कह सकते। ऐसे समय में हिंदी को वैकल्पिक विषय बनाना एक बड़ा खतरा उठाना है। दूसरी भाषाएं सीखना कितना भी जरूरी क्यों न हो, लेकिन हम अपनी भाषा को भगवान भरोसे नहीं छोड़ सकते। लिहाजा सवाल यह नहीं है कि अभी देश में अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा ले रहे करीब दो करोड़ बच्चे भविष्य में हिंदी के प्रति कितना समर्पित होंगे। समझना यह भी है कि हिंदी की बुनियाद किस तरह मजबूत हो। विश्वविद्यालयों में हिंदी का आकर्षण बढ़ेगा, पर इसे अधिक से अधिक पठनीय तो बनाएं। इसकी गुणवत्ता तो सुधारें। क्या हुमें इसकी चिंता नहीं होनी चाहिए?

लेखक - हेमेन्द्र मिश्र


साभार - अमर उजाला, प्रसंगवश, पेज नं. 10, लखनऊ संस्करण । शनिवार । 20 जून 2015

COMMENTS

BLOGGER: 1
  1. In order to get PayTM Cash, you need to buy the items or recharge using valid coupons and the PayTM cash will be credited as cash back.
    For recharges, it take less then 1 hour and for products purchase, it credited after the item shipped.
    For each product you buy, there it will display the valid coupons which you can use while checkout and effective cash back will be displayed right there before making final payment.
    The PayTM making good campaign with cash offers and most of the times you see a good discounted values for the items (including cashback).blogging for beginner.

    जवाब देंहटाएं

नाम

अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस,1,अटल बिहारी वाजपेयी,2,अमर उजाला,6,अशोक वाजपेयी,2,इतिहास,2,इसरो,1,एक साल,1,ओसामा मंजर,1,कविता,21,कहानी,2,कैलाश वाजपेयी,1,क्षुद्रग्रह,1,गोपालदास 'नीरज',1,जन्म दिवस,9,जयप्रकाश भारती,1,जयशंकर प्रसाद,1,जल संकट,1,जानकारी,1,ज्ञानेन्द्र रावत,1,टिप्पणी,11,डेली मिरर,1,डॉ . हरिवंश राय 'बच्चन',1,डॉ. रवींद्र चतुर्वेदी,1,डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन,1,तरुण विजय,1,तीज-त्यौहार,1,त्रिलोचन,2,दिलीप गुप्ते,1,दीपावली,1,देव आनंद,1,नमस्कार,1,नरेंद्र मोदी,1,नववर्ष,1,निबन्ध,2,नेताजी सुभाष चंद्र बोस,1,नेताजी सुभाषचंद्र बोस,1,पत्र,3,प्रधानमंत्री,1,प्रभा मजूमदार,1,प्रयाग शुक्ल,1,प्रेरक प्रसंग,1,प्रेरक विचार,1,प्रेरक-प्रसंग,1,प्रेरणादायक लेख,2,बॉक्सिंग डे,1,भगत सिंह,3,भगवान बुद्ध,1,भाई दूज,1,भारत,3,भारतेन्दु हरिश्चन्द्र,3,मंगलयान,1,मनोज बाजपेयी,1,महादेवी वर्मा,1,मार्स ऑर्बिटर मिशन,1,मास्टर रामकुमार,1,मुकेश पाण्डेय 'चन्दन',1,मैथिलीशरण गुप्त,1,यश,1,राजीव कटारा,1,राजीव सक्सेना,1,रामधारी सिंह 'दिनकर',1,राममोहन पाठक,1,रिपोर्ताज,1,लेख,15,लोहड़ी,1,विदेशी अखबार से,2,विनोबा भावे,1,विशेष,17,विश्व हिंदी सम्मेलन,1,विश्व हिन्दी दिवस,2,विश्व हिन्दी दिवस सप्ताह सम्मेलन-2016,1,वैज्ञानिक लेख,1,व्यंग्य,1,शिक्षक दिवस,1,शुभारंभ,1,श्री अरविन्द घोष,1,श्रीलंका,1,संकल्प,1,संपादकीय,1,संस्मरण,1,सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन 'अज्ञेय',1,समाज,2,सरदार वल्लभ भाई पटेल,1,साभार,27,सामान्य ज्ञान,2,सियारामशरण गुप्त,1,सुमित्रानन्दन पन्त,2,सूर्यकान्त त्रिपाठी ' निराला ',1,स्वागत,1,हर्ष,26,हिन्दी,12,हिन्दी चिट्ठा,15,हिन्दी दिवस,2,हिन्दुस्तान दैनिक,19,हिन्दुस्तान संपादकीय,2,हूबनाथ,1,हेमेन्द्र मिश्र,3,
ltr
item
हिन्दी चिट्ठा : खुद हमें हिंदी की कितनी चिंता है - हेमेन्द्र मिश्र
खुद हमें हिंदी की कितनी चिंता है - हेमेन्द्र मिश्र
माना जाता है मनुष्य व्यवहार के साथ भाषा हर क्षण बदलती है, क्योंकि यही बदलाव उसके जीवित होने का सबूत है। हिंदी भी दिनोंदिन बदल रही है, और बढ़ रही है। 2001 में ही देश की 42.2 करोड़ आबादी हिंदी बोल रही थी, जिसमें 2011 की जनगणना में इजाफा हुआ ही होगा। इसी तरह वैश्विक परिदृश्य में हिंदी सीखने वाले लोगों की संख्या भी पिछले आठ वर्षों में करीब 50 फीसदी बढ़ी है। आकलन यह भी है कि दुनिया की शीर्ष तीन भाषाओं में हिंदी शामिल है ! इन तमाम तस्वीरों के बाद भी इन दिनों हिंदी भाषाप्रेमी इस लोकप्रिय भाषा के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। आखिर क्यों? दरअसल, विकल्प आधारित क्रेडिट प्रणाली ( सीबीसीएस ) ने अंतर-स्नातक में हिंदी को वैकल्पिक विषय बना दिया है।
http://1.bp.blogspot.com/-8HLiHYUMAPg/VpJ4c1QFEsI/AAAAAAAACTc/bKNc88Q2pm8/s320/%25E0%25A4%25B5%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%25B6%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B5_%25E0%25A4%25B9%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%2582%25E0%25A4%25A6%25E0%25A5%2580_%25E0%25A4%25A6%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%25B5%25E0%25A4%25B8.JPG
http://1.bp.blogspot.com/-8HLiHYUMAPg/VpJ4c1QFEsI/AAAAAAAACTc/bKNc88Q2pm8/s72-c/%25E0%25A4%25B5%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%25B6%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B5_%25E0%25A4%25B9%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%2582%25E0%25A4%25A6%25E0%25A5%2580_%25E0%25A4%25A6%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%25B5%25E0%25A4%25B8.JPG
हिन्दी चिट्ठा
https://www.hindichittha.com/2016/01/khud-humein-hindi-ki-kitni-chinta-hai-hemendra-mishra.html
https://www.hindichittha.com/
https://www.hindichittha.com/
https://www.hindichittha.com/2016/01/khud-humein-hindi-ki-kitni-chinta-hai-hemendra-mishra.html
true
1774022179531435779
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy